जीवामृत का निर्माण एवं प्रयोग

जीवामृत निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री

क्रमांकआवश्यक सामग्रीमात्रा
1गाय का ताजा गोबर10 किलो
2गोमूत्र10 लीटर
3चने या अन्य दलहन का आटा2 किलो
4गुड़1 किलो
5प्लास्टिक का ड्रम200 लीटर क्षमता वाला
6पानी180 लीटर

जीवामृत निर्माण की प्रक्रिया

  1. 200 लीटर की क्षमता वाला एक प्लास्टिक का ड्रम लेते हैं एवं उपरोक्त वर्णित समस्त सामग्री को इस ड्रम में मिलाकर इसमे 180 लीटर पानी मिला लेते हैं।
  2. एक लकड़ी के डंडे की सहायता से इसे प्रतिदिन सुबह-शाम घड़ी की दिशा मे 5 से 10 मिनट तक हिलाते हैं, इस प्रक्रिया को 6 दिन तक करते हैं।
  3. इस ड्रम को छायादार स्थान में रखते हैं।
  4. 6 दिन बाद यह जीवामृत मृदा में उपयोग के लिए तैयार हो जाता है।

जीवामृत उपयोग का तरीका

200 लीटर तैयार जीवामृत 1 एकड़ में उपयोग करने के लिए पर्याप्त होता है, इसे सिंचाई करते समय मृदा में उपयोग करते है।

जीवामृत उपयोग के लाभ

  1. जीवामृत कम खर्च में तैयार होने वाला एवं सभी प्रकार की फसलों में समान रूप से उपयोग किया जा सकता है।
  2. यह पौधे की वानस्पतिक वृद्धि को बढ़ाता है।
  3. मृदा में लाभदायक सूक्ष्म जीवों की क्रियाशीलता को बढ़ाता है, अतः मृदा का स्वास्थय उत्तम बना रहता है
  4. मृदा में कार्बन एवं नाइट्रोजन के अनुपात (C:N Ratio) को संतुलित बनाता है।