ऐसे कल्चर जिनमे जीवाणुओं की जीवित कोशिकाएं होती हैं, जब प्रयोग में लाये जाते हैं तब अपनी शक्ति से वातावरणीय एवं मृदा में स्थिर नाइट्रोजन और भूमि में स्थित फास्फोरस को पौधों के लिए उपलब्ध करने का कार्य करते हैं जैव उर्वरक कहलाते हैं। विभिन्न प्रकार की मृदा स्थिति एवं फसलों की प्रकृति के आधार पर जैव उर्वरकों को निम्न प्रकार से विभक्त किया जा सकता है।
(a) राइजोबियम
ये बैक्टीरिया दल्हनी फसलों की जड़ों में गाँठ बनाकर सहजीवी रूप में निवास करते हैं एवं दल्हनी फसलों की जड़ों में पायी जाने वाली ग्रंथियों में नाइट्रोजन का स्थरीकरण करते हैं।
(b) एजेटोबेक्टोर तथा एजोस्पिरिलम
अनाज वाली फसलों, तिलहन तथा सब्जियों में नाइट्रोजन संस्थापन हेतु इन जैव उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है।
(c) अजोला
इसका प्रयोग धान आदि फसलों में कार्बनिक पदार्थ में वृद्धि के लिए किया जाता है।
(d) बैसिलस स्यूडोमोनास
मृदा में फास्फोरस की उपलब्धता बढ़ाने के लिए बैसिलस स्यूडोमोनास जीवाणु युक्त कल्चर का प्रयोग किया जाता है।