मल्चिंग (Mulching)

मल्चिंग का प्रयोग मुख्यतः वर्षा आधारित कृषि में किया जाता है, इसके अंतर्गत मृदा की सतह को किसी उपयुक्त पदार्थ की सहायता से ढँक दिया जाता है। मल्चिंग के लिए ऐसे पदार्थों का प्रयोग किया जाता है जो कि पौधों कि वृद्धि एवं विकास में सहायक हों।

मल्चिंग की उपयोगिता

  1. मल्चिंग मृदा में नमी संरक्षण के लिए कि जाने वाली एक प्रमुख क्रिया है।
  2. गर्मी के मौसम में मृदा का तापमान सामान्य बना रहता है।
  3. मृदा से जल कि वाष्पीकरण द्वारा होने वाली हानी को कम करता है।
  4. खरपतवारों को उगने से रोकता है।
  5. मृदा क्षरण को रोकता है।
  6. मृदा कि भौतिक एवं रासायनिक दशा में सुधार होता है।
  7. फसल कि उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार होता है।
  8. बहुत ही कम खर्च में कि जाने वाली गतिविधि है।

मल्चिंग में उपयोग कि जाने वाली सामग्री

(A) जीवांश पदार्थ

  1. विभिन्न प्रकार के बीज रहित खरपतवार
  2. धान के पुआल एवं भूसा इत्यादि
  3. मूँगफली के छिलकों का प्रयोग
  4. विभिन्न अनाजों के छिलकों का प्रयोग
  5. पेड़ कि छालों का प्रयोग
  6. लकड़ी का बुरादा
  7. जंगलों से प्राप्त बड़े आकार के पत्ते

(B) कृत्रिम पदार्थ

  1. पोलिथीन शीट का प्रयोग