एकीकृत कृषि प्रणाली
Integrated farming system
पर्यावरण प्रदूषण की समस्या में समय के साथ वृद्धि हो रही है साथ ही पानी का अत्यधिक दोहन करने से भूगर्भ में भी पानी का भंडार कम हो रहा है एवं गर्मी के मौसम में भुगर्भ के इस पानी में और भी कमी हो जाती है। भूगर्भ में पानी की इस कमी का परिणाम कृषि की उत्पादकता में कमी के रूप में दिखाई देता है। खेती से आमदनी इतनी कम है कि किसानों का रूझान दूसरे कामों की ओर होने लगा है अतः खेती के माध्यम से किसानों की आमदनी में वृद्धि करने के लिए कार्य किए जाने की आवश्यकता है।
किसानों को पूरे साल के लिए काम खेती में मिलना चाहिए जिससे किसानों को इतनी आमदनी मिलनी चाहिए की किसानों की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ती आसानी से होती रहे। वर्तमान व्यवस्था प्राकृतिक आपदाओं को बढ़ावा देता है प्राकृतिक संसाधनों के सरक्षण एवं उनकी सतत उपलब्धता बने रहने को बढ़ावा नहीं देता है। अतः इस समस्या के निवारण के लिए भी हमें (IFS: Integrated farming system) एकीकृत या समन्वित खेती को चुनने की आवश्यकता है। वर्तमान में खेती में विवधिकरण (diversification) नहीं है। वर्तमान में खेती में एकफसली प्रणाली की बहुलता है जैसे की वर्तमान में धान फसल को लेकर के हैं या धान के बाद केवल गेहू की फसल किसान के द्वारा ली जाती है इसके अलावा किसानों के पास कुछ विशेष कार्य नहीं है। इनके अलावा किसानों का खेती से जुड़ाव भी कम है या किसानों के पास एक कार्ययोजना नहीं है जिससे की किसान पूरे वर्ष खेती से जुडा रहे। इस तरह का सिस्टम हमारे पर्यावरण (ecology or environment) के भी अनुकूल नहीं है। इस तरह से यदि हम एकीकृत फसल प्रणाली को नहीं अपनाएगे तो हम हमारी आने वाल पीढी को भी एक अच्छा पर्यावरण नहीं दे पाएँगे। एकीकृत कृषि प्रणाली गरीब या छोटे किसानों के लिए बहुत ही अच्छी पद्धति है। एकीकृत या समन्वित कृषि (Integrated farming system) एक स्थान विशिष्ट (area specific) प्रणाली है. क्योंकि कई गतिविध एक स्थान विशेष तक ही सीमित होती है एवं अन्य स्थानों पर अन्य गतिविधि सफल होती है इस तरह हमारे पास कई गतिविधियों है जिन्हें हम स्थान विशेष की आवश्यकताओं के अनुसार अपना सकते है।
कृषि से प्राप्त होने वाला कचरा, भूसा अन्य उप उत्पाद जो कि एक प्रकार की उर्जा है, परतु वर्तमान में इस उर्जा का उचित प्रकार से उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि हमारे पास इस कचरे के उचित उपयोग या निपटान के लिए प्रभावी तंत्र या प्रणाली (System) नहीं है। इस प्रकार इस उर्जा का उपयोग किए जाने की आवश्यकता है। जैसे कि कोई भी कचरा यदि हम खुले में डाल देते हैं तो उसे कम से कम 8 माह खाद में परिवर्तित होने में लगते है लेकिन इसी कचरे में हम केंचुए का उपयोग कर लेते है तो केंचुए द्वारा इसे 40 से 50 दिनों में खाद में परिवर्तित कर दिया जाता है। इसके अलावा यदि वेस्ट डिकम्पोसर का उपयोग इसमे कर लिया जाता है तो यह और भी जल्दी खाद में परिवर्तित हो जाता है। इन्ही गोबर एवं कचरे को बायोगैस में डाला जाता है तो यह ईधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इन प्रक्रियाओं को भी अपनाने की आवश्यकता है। इन तरीकों को उपयोग करने के लिए किसानों को सिखाने की आवश्यकता है।
एकीकृत कृषि प्रणाली में एक गतिविधि मुख्य होती है एवं एक गतिविधि इसकी पूरक होती है, जैसे की कृषि से निकलने वाले पदार्थ इत्यादि पशुपालन में पशु चारे के रूप में काम आ आते है एवं पशुपालन से प्राप्त होने वाले पदार्थ कृषि में खाद के रूप में उपयोग में ले लिए जाते है। इस प्रकार ये एक दूसरे के लिए उर्जा का स्त्रोत बनते हैं एवं कृषि तथा पशुपालन में लगने वाली लागत कम हो जाती है। साथ ही किसानों को कई चीजों के लिए बाजार नहीं जाना पड़ता है। यह एक प्रकार का एकीकरण (integration) है। इस प्रकार की गतिविधियों पहले से प्रचलन में है परंतु वर्तमान में किसानों द्वारा एकीकृत कृषि प्रणाली ना अपनाने के कारण चलन से बाहर हो रही है। उदाहरण स्वरूप एक क्विटल मक्का द्वारा किसानो को 1700 या 1800 रूपये मिलते है पंरतु इसी मक्के को यदि किसान चुजों को खिलाता है तो उसे 40 से 50 हजार रूपये मिलेंगे। इस प्रकार किसान को मक्का का मूल्य वर्धित होकर मिलेगा। यह एक प्रकार का value edition conversion का उदाहरण है।
इस प्रकार एकीकृत कृषि प्रणाली कई गतिविधियों को अपने में शामिल करती है किसानों को सुरक्षा भी देती है। यदि एक गतिविधि में हानी हो जाती है तो दूसरी गतिविधि द्वारा किसानों को फायदा हो जाता है।
There is no waste and waste is the only misplaced resources इस प्रकार कोई भी चीज बेकार नहीं है बल्की ये ये संसाधन है जिनका हम उपयोग नहीं कर पाएं है। इस प्रकार कृषि, पशुपालन एवं अन्य गतिविधियों से निकलने वाले सभी प्रकार के कचरों का प्रयोगों एक दूसरे के पूरक आदानों के रूप में किए जाने की आवश्यकता है।
Integrated Farming System (एकीकृत कृषि प्रणाली) की आवश्यकता
- किसानों को वास्तविक रूप में किसान बनाना है नाकि सिर्फ भूमि का स्वामी
- क्योकि सामान्य कृषि में किसान पूरे वर्ष कृषि कार्य से जुड़ा हुआ नहीं है
- किसानों की गतिविधियों में विविधता नहीं है।
- क्योंकि किसान एवं उसके परिवार की संलग्नता कृषि कार्य में कम है।
- वर्तमान की कृषि पारिस्थितिकी के अनुकूल नहीं है।
- एकीकृत कृषि प्रणाली छोटे किसानों के लिए फायदेमंद है।
- यदि कोई एक गतिविधि में हानी हो जाती है तो भी किसान परिवार की आजीविका सुरक्षित रहती है।
उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए Integrated Farming System (एकीकृत कृषि प्रणाली) को अपनाने की आवश्यकता है।
एकीकृत कृषि प्रणाली को अपनाने से कई प्रकार के फायदे होंगे जैसे
- क्योंकि यह पूरी तरह से जैविक गतिविधि है जिससे मिट्टि की उर्वरकता में वृद्धि होगी।
- प्रति इकाई क्षेत्रफल में उत्पादकता में वृद्धि होती है।
- कई गतिविधियों से प्राप्त होने वाले पदार्थों द्वारा आपस में इनकी माँग पूरी होती रहती है।
- किसान के पास आमदनी के कई स्त्रोत होने से पैसों की दिक्कत खत्म हो जाती है। क्योंकि किसान को प्रत्येक समय कोई ना कोई गतिविधि से आय प्राप्त होती रहती है।
- क्योंकि परिवार का प्रत्येक सदस्य गतिविधि में साल भर शामिल होता है अत परिवार से छुपी हुई बेरोजगारी (hidden unemployment) खत्म हो जाती है।
- रासायनिक पदार्थों का उपयोग पूरी तरह से बन्द हो जाता है।
- किसान के परिवार को पोषण युक्त आहार पूरे वर्ष प्राप्त होता रहता है
- बायोगैस इत्यादि के उपयोग से किसानों की उर्जा की समस्या का समाधान हो जाता है।
- एकीकृत कृषि प्रणाली को अपनाने से चारे, लकड़ी, ईंधन इत्यादि के लिए किसानों की जंगल पर निर्भरता खत्म हो जाती है।
- रोजगार का निर्माण होता है, साथ ही किसी भी प्रकार का पर्यावरण प्रदूषण भी नहीं होता है।
- परिवार का एक शाश्वत आजीविका का जरिया तैयार हो जाता है।
- कयोंकि इसमे शामिल गतिविधियाँ भूमि एवं क्षेत्र के लिए विशिष्ट होती है अतः किसानों द्वारा आसानी से इन्हें अपना लिया जाता है।
- एकीकृत कृषि प्रणाली में शामिल गतिविधियाँ एक दूसरे की पूरक होती हैं नाकि प्रतिस्पर्धी जैसे कि कृषि से प्राप्त होने वाले विभिन्न प्रकार के उप-उत्पाद पशुपालन में खाद्य पदार्थ इत्यादि के काम में ले लिए जाते है एवं पशुपालन से प्राप्त होने वाले कचरों इत्यादि का प्रयोग कृषि में खाद के रूप में कर लिया जाता है।
- कृषि द्वारा प्राप्त होने वाले विभिन्न प्रकार के उत्पादों के पुनर्चक्रण के लिए हमारे पास पर्याप्त मात्रा में संसाधन (बायो गैस, डी कम्पोजर, वर्मी कम्पोस्ट निमार्ण इत्यादि) नहीं है। अतः कृषि के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के लिए पुनर्चक्रण का अभाव है। अतः इन बातों को ध्यान में रखते हुए भी हमें एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated farming system) को अपनाने की आवश्यकता है।
- कृषि एवं अन्य गतिविधियों के आपस में ऊर्ध्वाधर एवं क्षैतिज रूप में समावेश द्वारा एवं इनके उत्पादों में विभिन्न प्रकार से गुणवत्ता एवं मुल्य में वृद्धि के माध्यम से किसानों को अधिक आय प्राप्त होना सुनिश्चित किया जा सकता है।
एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated farming system) को निम्न स्वरूपों में अपनाया जा सकता है।
- मछली पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, सब्जीयों की खेती एवं बहुफसली कृषि को अपनाना
- फसल के साथ में मछली पालन एवं बकरी पालन
- फसल के साथ ही मछली पालन
- कृषि के साथ में पशुपालन एवं मछली पालन
- कृषि के साथ डेयरी व्यवसाय अपनाना
- डेयरी के साथ मछली पालन करना
- फसल उत्पादन, डेयरी एवं मछली पालन
- फसल उत्पादन, मुर्गी पालन, वर्मी कम्पोस्टिंग, अजोला पिट एवं मछली पालन
- फलोत्पादन के साथ पशुपालन
- पशुपालन के साथ चारा उत्पादन गतिविधि
अध्ययन के अनुसार फसल उत्पादन के साथ ही मछली पालन एवं बकरी पालन को सम्मिलित करने से कृषि की उत्पादकता में तीन गुना तक वृद्धि हो जाती है। एक दूसरे अध्ययन के अनुसार एक हेक्टेयर खेत में फसल उत्पादन के साथ ही यदि मछली पालन एवं पशुपालन भी किया जाता है तो आय में तीन गुना तक वृद्धि हो जाती है। इस प्रकार उपरोक्त गतिविधियों को करने से श्रम में देड गुना एवं आमदनी में 3 गुना तक वृद्धि हो जाती है एवं किसानों की आदतों में थोडे से बदलाव से आमदनी में बढ़ोत्तरी हो जाती है। साथ ही पूरे परिवार को वर्ष भर के लिए काम मिलने लगता है। हमें किसानों का उत्साहवर्धन करके इन गतिविधियों को प्रचलन में लाना चाहिए