जनवरी एवं फरवरी माह के कृषि कार्य

जनवरी एवं फरवरी माह के दौरान किए जाने वाले कृषि कार्य

  • उकठा एवं झुलसा बीमारी के नियंत्रण के लिए संक्रमित पौधों के आसपास ट्राइकोडर्मा विरिडी @ 5 मिली प्रति लीटर पानी से सींचे
  • टमाटर, बैगन एवं मिर्ची आदि फसलों की नर्सरी में अर्ध गलन रोग के नियंत्रण के लिए फफूँद नासक दवा की १ से १.५ ग्राम मात्रा प्रति लिटर पानी के हिसाब से १० से १५ दिन के अंतराल से दो बार छिड़काव करें
  • नीम के बीजों का अर्क (NSKE) ५ % (५० gm/लीटर) या नीम का तेल २ लीटर प्रति एकड़ ५०० लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव प्रत्येक फसल एवं सब्जियों में करें
  • वयष्क हानिकारक कीटों को पकड़ने के लिए प्रकाश प्रपंच का प्रयोग शाम को ७ बजे से रात १० बजे के बीच में करें
  • थ्रिप्स, सफ़ेद मक्खी, माहु एवं फुदका के नियंत्रण के लिए पीले चिपचिपे प्रपंच (यलो स्टीकी ट्रेप) का उपयोग उपयोग करें
  • सिंचाई के लिए ड्रिप सुविधा उपलब्ध होने पर सब्जियों की सिंचाई ड्रिप विधि के द्वारा ही करें, साथ ही मृदा में नमी संधारण के लिए विभिन्न प्रकार के मल्चिंग माध्यमों का भी प्रयोग करें
  • मृदा में वायु के सुचारु रूप से परिसंचरण एवं खरपतवार नियंत्रण के लिए नियमित रूप से निंदाई-गुड़ाई करते रहें
  • दलहनी तिलहनी एवं सब्जी फसलों को पाले से बचाने हेतु शाम के समय खेतों की मेढ़ों पर कचरा जलाकर धुआँ करें या हल्की सिंचाई करें
  • कीटों के नियंत्रण मे सहायक परभक्षि पक्षियों के लिए खेतों में १० से १२ बर्ड पारचेस T आकार के प्रति एकड़ की दर से खड़े किए जाने चाहिए
  • ग्रीष्मकालीन भिंडी की बोवाई जनवरी से फरवरी के मध्य की जा सकती है इसके लिए १८ से २० kg प्रति हेक्ट॰ की दर से बीजों का प्रयोग करें एवं ३०x१५ cm की दूरी लाइन एवं पौधों के मध्य रखें
  • सब्जी एवं अन्य फसलों में नमी संरक्षण के लिए खरपतवारों एवं अन्य फसलों के अवशेषों से मल्चिंग (मिट्टी को ढकना) की जानी चाहिए
  • अरहर फसल में माहु के नियंत्रण के लिए नीम के बीज के चूर्ण का 5% घोल बनाकर छिड़काव करें।
  • किसी भी तरह के फसल अवशेष एवं खरपतवारों के अवशेषों को नस्ट करते रहना चाहिए क्योंकि ये कई प्रकार के कीटों के लिए प्रजनन एवं संदूषण का मुख्य साधन होते हैं