धान की खेती
खेत का चुनाव
गहरी, उचित जल निकास वाली बलुई एवं काली दोमट मृदा जिसमे कार्बनिक पदार्थों की पर्याप्त मात्रा हो धान की खेती के लिए उपयुक्त है।
गहरी जुताई
3 वर्ष में एक बार मई या जून माह में गहरी जुताई अवश्य करें।
बीज दर
श्री पद्धति हेतु 1 हेक्टयर क्षेत्र के लिए 4 से 5 किलो बीज का चुनाव करें
बीज उपचार
- एक घड़े में पानी लेकर उसमें एक अंडा डालें, अब पानी में नमक मिलाते रहें जब तक की अंडा पानी की सतह पर ऊपर ना आ जाये। अब बीज को पानी में डालें और पानी के ऊपर तैरते हुए हल्के बीजों को बाहर निकाल दें।
- अमृत पानी, एजेटोबेक्टोर आदि से बीजोपचार करें।
- अब इन बीजों को रात भर के लिए टाट में दबाकर अंकुरण के लिए रखें
- सुबह इन बीजों को नर्सरी बेड में बुवाई कर दें।
नर्सरी के लिए खेत की तैयारी
एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 100 वर्ग मीटर या प्रति एकड़ 40 वर्ग मीटर आकार की नर्सरी तैयार करें। । नर्सरी क्षेत्र का चुनाव पानी के क्षेत्र के पास होना चाहिए। नर्सरी का क्षेत्र 2 से 3 इंच उठा हुआ होना चाहिए। नर्सरी बेड के ऊपर प्लास्टिक सीट बिछा हुआ होना चाहिए ताकि पौधों की जड़े अधिक गहराई में नहीं जाने पाये।
नर्सरी बेड का आकार 1 मीटर चौड़ाई, 5 मीटर लंबाई एवं 5 सेमी. की ऊँचाई में रखें।
नर्सरी बेड तैयार होने पर इसे वर्मी कम्पोस्ट या गोबर की सड़ी खाद की 0.5 सेमी. की पतली पर्त से ढकें।
तैयार नर्सरी बेड को धान के पुआल से या उपलब्ध साधन के द्वारा ढक दें
नर्सरी हेतु मृदा की तैयारी
100 वर्ग मीटर नर्सरी हेतु 4 घन मीटर मृदा का मिश्रण तैयार किया जाना चाहिए। इस मिश्रण में (1) 70 प्रतिशत मृदा, 20 प्रतिशत बायोगैस की स्लरी या गोबर का खाद एवं 10 से 15 प्रतिशत धान के छिलके का प्रयोग किया जाना चाहिए (2) 70 प्रतिशत मिट्टी एवं 30 प्रतिशत वर्मी कम्पोस्ट या गोबर की खाद का उपयोग करें।
बीज नर्सरी में डालने से पूर्व अंकुरण
बीज को 24 घंटे के लिए पानी में डुबो कर रखते हैं, इसके बाद बीज को जूट के बोरे में दबाकर रख दिया जाता है जब तक की बीजों से जड़ें निकल कर 2 से 3 मिमी की हो जाएँ । 100 से 150 ग्राम बीजों को 1 वर्ग मीटर नर्सरी में समान रूप से बो दिया जाता है। नर्सरी में बोवाई से 5 दिन तक भारी वर्षा से सुरक्षा करें। पौधे प्रत्यारोपित किए जाने के 2 दिन पहले ही नर्सरी से पानी को निकाल दें।
पौधों का मुख्य खेत में प्रत्यारोपण
- जुलाई के दूसरे पखवाड़े से अगस्त अंत तक बुवाई या रोपाई की जा सकती है।
- 15 दिन पुरानी एवं एक पौध प्रत्येक स्थान में लगाएँ
- नर्सरी से पौधों को निकालने के बाद 30 मिनट के अंदर खेत में लगा दें।
- 25 X 25 सेमी. की दूरी पर वर्गाकार विधि से पौधे लगाएँ
- पौध प्रत्यारोपण के 10 दिन बाद खाली स्थानों में पौधों को लगाएँ
- प्रारंभ के 10 दिन तक मृदा में सिर्फ नमी बनाये रखने के हेतु सिंचाई करें या वर्षा का जल न रुकने दें, अधिक पानी को खेत से बाहर निकाल दें।
जैविक खाद प्रबंधन
- वर्मी कम्पोस्ट, नाड़ेप या अमृत पानी, जीवामृत इत्यादि जैविक खादों का प्रयोग खाद के रूप में करें।
- फसल में 10 से 12 दिनों के अंतराल पर अमृत पानी का छिड़काव करें।
खरपतवार प्रबंधन
5 से 6 निंदाई हाथों द्वारा करके खेत को खरपतवार से मुक्त रखें।
समन्वित कीट प्रबंधन
- ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करें।
- खेत को फसल अवशेषों से मुक्त रखें तथा मेढ़ों की सफाई रखें।
- आवश्यकता पड़ने पर रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करें।