किसान भाइयों वर्तमान ठंड के मौसम मे फसलों को पाला/तुसार से बचाव के लिए पर्याप्त सावधानी बरते, जैसे की प्रत्येक वर्ष दिसंबर एवं जनवरी के मौसम में होता है मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं भारत के कई अन्य राज्यों में कई स्थानों पर पाले से फसलों को काफी अधिक क्षति पहुँचती है। जिसमे दलहन वर्ग की फसलें जैसे अरहर, चना एवं मसूर इत्यादि प्रमुख है जो की अधिक प्रभावित होती है। सब्जी वर्गीय फसलों एवं नर्सरी अवस्था में भी पाला पड़ने पर बहुत अधिक नुकसान होता है
अपनी अनाज, दलहन एवं सब्जी वर्गीय फसलों साथ ही इनकी नर्सरी को पाले से बचाने के लिए निम्न बातों पर अवश्य अमल करें।
- सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने पर फसलों में सिंचाई अवश्य करें
- मलचिंग या ढकने से भी पाले से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। छोटे पौधों, सब्जियों (टमाटर, मिर्च, बैंगन, आलू, गोभी) और नर्सरी को टाट, बोरे, पुआल या पॉलिथीन या वृक्षों के बड़े पत्तों से ढक दें प्रयास यह रहे की पौधों को सीधे हवा ना लगे।
- रात के समय में खेत के चारों तरफ एवं खेत के बीच में पौधों के अवशेष इत्यादि जलाकर धुआँ करें। धुआँ करने से यह खेत के ऊपर एक पर्त के रूप में फैल जाता है एवं एक अवरोधी पर्त की तरह कार्य करता है जिससे खेत के ऊपर की हवा गर्म बनी रहती है और तापमान अधिक नहीं गिर पाता है।