चने की खेती

  1. गर्मियों के दौरान एक गहरी जुताई करें।
  2. दो बार हेरोईंग की क्रिया करें।
  3. 5 टन गोबर की खाद का प्रयोग प्रति एकड़ की दर से दूसरी हेरोईंग के पूर्व करें।
  1. वर्षा आधारित कृषि की दशा में चने की बुवाई अक्टूबर के प्रथम पखवाड़े में हो जानी चाहिए।
  2. सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने पर चने की बुवाई अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े से नवम्बर के प्रथम सप्ताह तक की जा सकती है।

फसल अन्तरण

बीजों का प्रकारलाइन से लाइन की दूरीपौधे से पौधे की दूरी
सामान्य/देशी बीजों के लिए30 सेमी.10 सेमी.
काबुली चने के लिए45 सेमी.10 सेमी.
देरी से बोवनी की दशा में25 सेमी.10 सेमी.
देषी चने की किस्में:-JG 315, JG 74, JG 322, JG 11, JG 130, JG 16, JAKI 9218, JG 63, JG 412, JG 226 and JG 6
काबुली चना :-JGK 1, KGK 2, and JGK 3
गुलाबी चना :-JGG 1
सूखे में बोवाई हेतु किस्म :-JG 11, JG 130, JG 63, JG 226
आंशिक सिंचित किस्मेंJG 315, JG 11, JG 218, JG 130, JG 16, JG 63
देरी से बोवाई हेतु सिंचित काबुली किस्मेः-JGK 1, JGK 2, JGK 3, Gulabi JGG 1

बीज दर

देशी बीजों के लिए70 किलो प्रति हेक्टेयर
मध्यम आकार के बीजों के लिए80 किलो प्रति हेक्टे
काबुली चने के लिए100 किलो प्रति हेक्टेयर

बीज उपचार

ट्राईकोडरमा5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से
राईजोबियम2.5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से
पी. एस. बी. (फास्फोरस घोलक जीवाणु)2.5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से

अंतरवर्ती फसल

चना: सरसों4 : 2
चना: सूर्यमुखी या अलसी4 : 1

ट्रेप क्राप

ज्वार250 ग्राम प्रति हेक्टेयर
सरसों125 ग्राम प्रति हेक्टेयर
धनियाँ250 ग्राम प्रति हेक्टेयर
होईंगबुवाई के 25 दिन बाद
निंदाई गुड़ाईबुवाई के 30 दिन बाद

समन्वित कीट नियंत्रण

  • प्रति हेक्टेयर दो फीरोमोन ट्रेप लगाए।
  • गर्मी में गहरी जुताई प्रत्येक 3 साल मे एक बार करें।
  • चने की समय से बुवाई करें।
  • चना : सरसों या धनियों कों 6 अनुपात 2 के अनुपात में अंतरवर्ती फसल के रूप में लगाए।
  • कीट आकर्षक फसल (ट्रेप क्राप) के रूप में गेंदे को खेत के चारो ओर लगाएँ।
  • 200 मि.ली. दशपर्णी अर्क का स्प्रे प्रति 15 लीटर पानी में मिलाकर करें।
  • 75 मि.ली. Beauveria bassiana प्रति 15 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
  • 200 मि.ली. HNPV 200 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ खेत में स्प्रे करें।
  • बर्ड पारचेस (पक्षियों के बैठने के लिए स्थान) का प्रयोग करें।
  • ट्राइकोडर्मा विरिडी 5 किलो को 100 किलो कम्पोस्ट में मिलाकर फसल की जड़ क्षेत्र में प्रयोग करें।

समन्वित रोग नियंत्रण

  • गर्मी में खेत की गहरी जुताई करें।
  • उचित फसल चक्र अपनाए।
  • फसल की समय से बोवनी करें।
  • रोग प्रतिरोधक जातियों का प्रयोग करें जैसे
    • देशी चने के लिए :- JG-322, JG-315, JG-74, JG-130, JG-14, JG-12, JG-63, JG-11, JG-16, Vijay, Digvijay, JSC-55 आदि
    • काबुली चने के लिए :- JGK-1, JGK-2, JGK-3