बीज उपचार

बीजों में पाए जाने वाले रोगाणुओं को नष्ट करने के लिए, भूमि में पाये जाने वाले रोगाणुओं फसलों को बचाने के लिए, दलहनी फसलों में नाइट्रोजन स्थरीकरण के लिए एवं मृदा में उपस्थित स्थिर फास्फोरस को पौधे को उपलब्ध करने के लिए बुवाई पूर्व बीजोपचार किया जाता है।

A. भौतिक बीज उपचार

  1. गर्म पानी द्वारा बीज उपचार :- इस विधि में बीजों को 54 डिग्री C तापक्रम पर 5 से 10 मिनट तक रख कर बाहर निकालकर सुखा लिया जाता है। इससे कई प्रकार की बीज जनित बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है।
  2. सौर उष्णता उपचार :- इस विधि में बीजों को मई-जून के माह में धूप में फर्श पर फैला दिया जाता है जिससे बीजों में उपस्थित रोगजनक तेज धूप में समाप्त हो जाते हैं।

B. रसायनों ( कवकनाशियों) द्वारा बीज उपचार)

बीज जनित विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाव करने के लिए कवकनाशियों (फंगीसाइड) से बीजों को उपचारित किया जाता है

जैसे :-

  1. मक्का, ज्वार व बाजरा जैसी अनाज वाली फसलों को थायराम रसायन से 2.5 प्रतिशत की दर से बीजोपचार करते हैं
  2. गेंहू बीज को विटावेक्स से 2.5 ग्राम प्रति किलो की दर से बीजोपचार किया जाता है
  3. वीटावेक्स का प्रयोग गेंहू एवं जौ फसलों के स्मट एवं रस्ट रोगों के नियंत्रण हेतु बीजोपचार के रूप में किया जाता है
  4. प्लांटवेक्स का प्रयोग कई प्रकार की फसलों में स्मट एवं रस्ट रोगों के रोकथाम के लिए किया जाता है

C. फसलों को नाइट्रोजन, फास्फोरस जैसे पोषक तत्व प्रदान करने के लिए बीजोपचार

  1. दलहनी फसलों में राइजोबियम कल्चर से बीजोपचार
  2. अदलहनी या अनाज वाली फसलों में पी. एस. बी. कल्चर से बीजोपचार

बीजामृत द्वारा बीज उपचार

बीजामृत निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री

कृमांकआवश्यक सामग्रीमात्रा
1देशी गाय का ताजा गोबर50 ग्राम
2गोमूत्र50 एमएल
3गाय का दूध10 एमएल
4चूना2.5 ग्राम
5पानी1 लीटर
6प्लास्टिक की बाल्टी1

बीजामृत निर्माण

  1. उपरोक्त समस्त पदार्थों को ठीक प्रकार से मिलाकर रात भर के लिए रख देते हैं।
  2. इस तैयार घोल को बीज के ऊपर छिड़क कर बीजोपचार करते हैं।
  3. बीज को छायादार स्थान में रखकर सुखा लिया जाता है।
  4. 10 से 15 मिनट बाद बीज के सूखने पर बोवाई कर सकते हैं।

नर्म छिलके (seed coat) वाले बीज के उपचार के समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए अन्यथा बीज के छिलके निकल जाने पर अंकुरण में कमी आ जाती है। अतः बीज उपचार सावधानी पूर्वक किया जाना चाहिए।