Month: January 2026

  • जनवरी एवं फरवरी माह के कृषि कार्य

    जनवरी एवं फरवरी माह के दौरान किए जाने वाले कृषि कार्य

    • उकठा एवं झुलसा बीमारी के नियंत्रण के लिए संक्रमित पौधों के आसपास ट्राइकोडर्मा विरिडी @ 5 मिली प्रति लीटर पानी से सींचे
    • टमाटर, बैगन एवं मिर्ची आदि फसलों की नर्सरी में अर्ध गलन रोग के नियंत्रण के लिए फफूँद नासक दवा की १ से १.५ ग्राम मात्रा प्रति लिटर पानी के हिसाब से १० से १५ दिन के अंतराल से दो बार छिड़काव करें
    • नीम के बीजों का अर्क (NSKE) ५ % (५० gm/लीटर) या नीम का तेल २ लीटर प्रति एकड़ ५०० लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव प्रत्येक फसल एवं सब्जियों में करें
    • वयष्क हानिकारक कीटों को पकड़ने के लिए प्रकाश प्रपंच का प्रयोग शाम को ७ बजे से रात १० बजे के बीच में करें
    • थ्रिप्स, सफ़ेद मक्खी, माहु एवं फुदका के नियंत्रण के लिए पीले चिपचिपे प्रपंच (यलो स्टीकी ट्रेप) का उपयोग उपयोग करें
    • सिंचाई के लिए ड्रिप सुविधा उपलब्ध होने पर सब्जियों की सिंचाई ड्रिप विधि के द्वारा ही करें, साथ ही मृदा में नमी संधारण के लिए विभिन्न प्रकार के मल्चिंग माध्यमों का भी प्रयोग करें
    • मृदा में वायु के सुचारु रूप से परिसंचरण एवं खरपतवार नियंत्रण के लिए नियमित रूप से निंदाई-गुड़ाई करते रहें
    • दलहनी तिलहनी एवं सब्जी फसलों को पाले से बचाने हेतु शाम के समय खेतों की मेढ़ों पर कचरा जलाकर धुआँ करें या हल्की सिंचाई करें
    • कीटों के नियंत्रण मे सहायक परभक्षि पक्षियों के लिए खेतों में १० से १२ बर्ड पारचेस T आकार के प्रति एकड़ की दर से खड़े किए जाने चाहिए
    • ग्रीष्मकालीन भिंडी की बोवाई जनवरी से फरवरी के मध्य की जा सकती है इसके लिए १८ से २० kg प्रति हेक्ट॰ की दर से बीजों का प्रयोग करें एवं ३०x१५ cm की दूरी लाइन एवं पौधों के मध्य रखें
    • सब्जी एवं अन्य फसलों में नमी संरक्षण के लिए खरपतवारों एवं अन्य फसलों के अवशेषों से मल्चिंग (मिट्टी को ढकना) की जानी चाहिए
    • अरहर फसल में माहु के नियंत्रण के लिए नीम के बीज के चूर्ण का 5% घोल बनाकर छिड़काव करें।
    • किसी भी तरह के फसल अवशेष एवं खरपतवारों के अवशेषों को नस्ट करते रहना चाहिए क्योंकि ये कई प्रकार के कीटों के लिए प्रजनन एवं संदूषण का मुख्य साधन होते हैं
  • मौसम पूर्वानुमान 3 जनवरी 2026

    3 जनवरी, 2026 तक, इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने सर्दियों की बढ़ती ठंड और बदलते मौसम के पैटर्न के कारण मध्य प्रदेश के लिए कई एडवाइज़री जारी की हैं।

    मुख्य मौसम एडवाइज़री

    घने कोहरे का अलर्ट: राज्य के अलग-अलग हिस्सों, खासकर ग्वालियर, दतिया और उत्तरी जिलों में रात और सुबह के समय घने से बहुत घने कोहरे की उम्मीद है। इससे रेल और सड़क यात्रा पर काफी असर पड़ रहा है, कुछ ट्रेनों के कई घंटे लेट होने की खबर है।

    कोल्ड डे की चेतावनी: आज और कल पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में “कोल्ड डे” (जिसमें अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे चला जाता है) की स्थिति हो सकती है।

    कोल्ड वेव का बढ़ना: 4 जनवरी तक कोल्ड वेव के और तेज़ होने और फैलने की उम्मीद है, जिसका असर मुख्य रूप से रीवा, सीधी और सिंगरौली जैसे उत्तर-पूर्वी और पूर्वी जिलों पर पड़ेगा।

    बारिश का अलर्ट: हवा के पैटर्न में बदलाव की वजह से अगले 2-3 दिनों में कुछ ज़िलों में हल्की बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है, जिसके बाद तापमान में तेज़ी से गिरावट आ सकती है।

    हालांकि कुछ इलाकों में कम से कम तापमान में थोड़ी अस्थाई बढ़ोतरी देखी गई (लगभग 1°C से बढ़कर 5°C तक), लेकिन यह राहत ज़्यादा देर तक नहीं रहने की उम्मीद है।

    सबसे ठंडी जगह: पचमढ़ी में राज्य में सबसे कम तापमान रिकॉर्ड किया जा रहा है।

    विज़िबिलिटी: ग्वालियर और आस-पास के उत्तरी इलाकों में सुबह-सुबह विज़िबिलिटी कुछ मामलों में 50–200 मीटर से भी कम हो गई है।

    सुरक्षा के सुझाव
    सफ़र: अगर सुबह-सुबह गाड़ी चला रहे हैं, तो फ़ॉग लाइट का इस्तेमाल करें और दूसरी गाड़ियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। अगर आप दिल्ली या दूसरे उत्तरी रास्तों की ओर ट्रेन से जा रहे हैं तो देरी हो सकती है।

    हेल्थ: कड़ाके की ठंड से बचने के लिए लेयर वाले कपड़े पहनें, खासकर सूरज डूबने के बाद तापमान में अचानक गिरावट के दौरान।

    अपडेट्स: मौसम के हालात तेज़ी से बदल रहे हैं। आप IMD भोपाल की ऑफिशियल साइट पर ज़िले के हिसाब से लाइव अपडेट्स देख सकते हैं।

  • पाला से बचाव की सलाह

    किसान भाइयों वर्तमान ठंड के मौसम मे फसलों को पाला/तुसार से बचाव के लिए पर्याप्त सावधानी बरते, जैसे की प्रत्येक वर्ष दिसंबर एवं जनवरी के मौसम में होता है मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं भारत के कई अन्य राज्यों में कई स्थानों पर पाले से फसलों को काफी अधिक क्षति पहुँचती है। जिसमे दलहन वर्ग की फसलें जैसे अरहर, चना एवं मसूर इत्यादि प्रमुख है जो की अधिक प्रभावित होती है। सब्जी वर्गीय फसलों एवं नर्सरी अवस्था में भी पाला पड़ने पर बहुत अधिक नुकसान होता है

    अपनी अनाज, दलहन एवं सब्जी वर्गीय फसलों साथ ही इनकी नर्सरी को पाले से बचाने के लिए निम्न बातों पर अवश्य अमल करें।

    • सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने पर फसलों में सिंचाई अवश्य करें
    • मलचिंग या ढकने से भी पाले से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। छोटे पौधों, सब्जियों (टमाटर, मिर्च, बैंगन, आलू, गोभी) और नर्सरी को टाट, बोरे, पुआल या पॉलिथीन या वृक्षों के बड़े पत्तों से ढक दें प्रयास यह रहे की पौधों को सीधे हवा ना लगे।
    • रात के समय में खेत के चारों तरफ एवं खेत के बीच में पौधों के अवशेष इत्यादि जलाकर धुआँ करें। धुआँ करने से यह खेत के ऊपर एक पर्त के रूप में फैल जाता है एवं एक अवरोधी पर्त की तरह कार्य करता है जिससे खेत के ऊपर की हवा गर्म बनी रहती है और तापमान अधिक नहीं गिर पाता है।